व्यवस्थित चल समारोह एवं समयबद्ध प्रतिमा विसर्जन को लेकर गाटरघाट में रहेगी अतिरिक्त विसर्जन कुंड की व्यवस्था
निगमायुक्त सुश्री परिहार ने प्रतिमाओं के सुचारु विसर्जन हेतु तैनात किए अतिरिक्त 28 कर्मचारी
कटनी – नवरात्रि पर्व, जवारा विसर्जन एवं दशहरा (विजयादशमी) पर श्रद्धालुओं की सुविधा, चल समारोह और प्रतिमाओं के सुरक्षित, सुचारु एवं समयबद्ध विसर्जन को दृष्टिगत रखते हुए इस वर्ष गाटरघाट में अतिरिक्त विसर्जन कुंड की व्यवस्था की जाकर दो विसर्जन कुंडों का निर्माण कराया गया है। चल समारोह को बिना किसी रुकावट के जारी रखने, विसर्जन के दौरान भीड़ का व्यवस्थित प्रबंधन करने और श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार,आईएएस ने संशोधित आदेश जारी कर निर्मित कुंडों पर अतिरिक्त 28 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित की है।
निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार ने बताया कि गाटर घाट में अतिरिक्त कृत्रिम कुण्ड होने से जहां प्रतिमाओं के विसर्जन में आसानी होगी, वही चल समारोह भी बिना किसी रुकावट के समयबद्ध तरीके से अनवरत जारी रहेगा और प्रतिमाओं का विसर्जन भी समय से हो सकेगा।
दो कुंडों पर तीन पालियों में रहेगी तैनाती
निर्धारित व्यवस्था के तहत गाटरघाट स्थित राम मंदिर के सामने कुंड क्रमांक-1 तथा छैघरा की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित कुंड क्रमांक-2 में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके लिए प्रातः 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक, दोपहर 2 बजे से रात्रि 9 बजे तक तथा रात्रि 9 बजे से प्रतिमा विसर्जन समाप्त होने तक तीन पालियों में ड्यूटी लगाई गई है। सहायक यंत्री श्री सुनील सिंह को प्रभारी तथा उपयंत्री श्री रवि हनोते एवं श्री सुनील तिवारी को सहायक प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
व्यवस्थाओं की सतत निगरानी के निर्देश
निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार ने सभी अधिकारी-कर्मचारियों को निर्धारित समय पर ड्यूटी स्थल पर उपस्थित रहकर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कुंड प्रभारियों को पालिवार कर्मचारियों की तैनाती, कार्यों के समन्वय एवं व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करने के लिए निर्देशित किया गया है। साथ ही सभी संबंधित कर्मचारियों को मोबाइल फोन चालू रखने और विसर्जन स्थल पर प्राप्त शिकायतों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।
निगम प्रशासन ने बताया कि गाटरघाट में दो विसर्जन कुंडों के निर्माण और कर्मचारियों की निर्धारित तैनाती से श्रद्धालुओं को सुविधा उपलब्ध कराने, विसर्जन प्रक्रिया को सम्बद्ध और व्यवस्थित रखने तथा पर्व के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।

