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स्कूल के बच्चों की जान पर खतरा! भटूरा खदान की ब्लास्टिंग पर उठे सवाल, शिकायत पहुँची वल्लभ भवन

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स्कूल के बच्चों की जान पर खतरा! भटूरा खदान की ब्लास्टिंग पर उठे सवाल, शिकायत पहुँची वल्लभ भवन

प्राथमिक स्कूल में दरारें आने का आरोप, 200 मीटर नो-माइनिंग जोन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका; मुख्यमंत्री कार्यालय से उच्चस्तरीय जाँच की मांग

मैहर/भोपाल। मैहर जिले के ग्राम भटूरा स्थित चूना पत्थर खदान में कथित अनियमित खनन और बेखौफ ब्लास्टिंग का मामला अब राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन तक पहुँच गया है। खदान के नजदीक संचालित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। भोपाल निवासी आर्यन सोनी ने 29 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत प्रस्तुत कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं संयुक्त जाँच कराने की मांग की है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि खदान में लगातार हो रही ब्लास्टिंग से नजदीक स्थित प्राथमिक विद्यालय के भवन में दरारें आ रही हैं और उसकी संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला महज खनन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूली बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन जाएगा।

200 मीटर नो-माइनिंग जोन की अनदेखी का आरोप

शिकायत के अनुसार, ग्राम भटूरा में खसरा नंबर 15/1 के अंतर्गत 6.104 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित चूना पत्थर खदान को राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण द्वारा 24 जुलाई 2023 को पर्यावरणीय स्वीकृति जारी की गई थी। शिकायतकर्ता ने स्वीकृति की शर्तों के पालन पर सवाल उठाते हुए पक्की सड़क से 200 मीटर के नो-माइनिंग जोन, पट्टा सीमा के पास 7.5 मीटर सुरक्षा बैरियर और निर्धारित खनन सीमाओं का मौके पर सत्यापन कराने की मांग की है।

इसके अलावा वर्ष 2026-27 और आगामी अवधि के लिए स्वीकृत खनन योजना, खनन एवं परिवहन की वैधानिक अनुमतियों तथा पर्यावरणीय शर्तों के अनुपालन की भी जांच कराने की मांग की गई है।

ब्लास्टिंग से स्कूल भवन को कितना नुकसान? वैज्ञानिक जाँच की मांग

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू स्कूल भवन की सुरक्षा है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों से स्कूल भवन का संरचनात्मक परीक्षण कराया जाए। साथ ही ब्लास्टिंग के दौरान उत्पन्न होने वाले भू-कंपन और वायु दबाव का वैज्ञानिक तरीके से मापन किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भवन में आई कथित दरारों का संबंध खदान की ब्लास्टिंग से है या नहीं।

कटनी कनेक्शन की चर्चा, वास्तविक संचालन की भी हो जांच

खदान के सरकारी अभिलेखों में पट्टाधारी के रूप में के.के. गौतम (कृष्णकांत गौतम) का नाम दर्ज बताया गया है। वहीं क्षेत्र में खदान के वास्तविक संचालन और प्रबंधन को लेकर कटनी के ‘पप्पू’ नामक व्यक्ति की भूमिका की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं और कथित प्रभाव को लेकर स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि खदान के वास्तविक संचालन, प्रबंधन और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका का भी निष्पक्षता से सत्यापन किया जाए।

मुख्यमंत्री कार्यालय से संयुक्त जांच टीम गठित करने की मांग

शिकायत में कलेक्टर मैहर की निगरानी में जिला खनिज अधिकारी, खान सुरक्षा महानिदेशालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित करने का अनुरोध किया गया है। साथ ही DGPS सर्वे के जरिए वास्तविक उत्खनन सीमा, सुरक्षा बैरियर, गारलैंड ड्रेन, सेटलिंग टैंक और नो-माइनिंग जोन की स्थिति की जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि यदि जांच में पर्यावरणीय नियमों, ब्लास्टिंग मानकों अथवा जनसुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो खदान का असुरक्षित संचालन तत्काल रोककर जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

अब बड़ा सवाल: बच्चों की सुरक्षा पहले या खदान का कारोबार?

भटूरा खदान से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच अब जरूरी हो गई है। सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर स्कूल भवन और खदान की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करेंगे, या यह शिकायत भी सरकारी फाइलों में सिमटकर रह जाएगी? ग्रामीणों और अभिभावकों की निगाहें अब जिला प्रशासन और राज्य शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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