कटनी नगर निगम में फिर बड़ी कार्रवाई: जर्जर भवन मामले में उपयंत्री संजय मिश्रा निलंबित
बुजुर्ग की मौत के बाद निगम प्रशासन सख्त, समय पर जर्जर भवन नहीं हटाने और लापरवाही बरतने पर गिरी गाज
कटनी। नगर निगम कटनी में लापरवाही के मामलों पर निगमायुक्त तपस्या परिहार ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। वार्ड क्रमांक 27 में सागर पुलिया के पास स्थित जर्जर भवन को समय पर नहीं तोड़ने और संबंधित कार्रवाई में उदासीनता बरतने के मामले में उपयंत्री संजय मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बताया गया है कि जर्जर भवन का एक हिस्सा गिरने से एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नगर निगम प्रशासन ने संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाया है।
पहले जारी हुआ था भवन तोड़ने का आदेश, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित जर्जर भवन को तोड़ने के लिए पूर्व में आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद भवन को समय रहते हटाने की कार्रवाई नहीं की गई। मामले में उपयंत्री संजय मिश्रा को कारण बताओ सूचना-पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। लेकिन उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर वस्तुस्थिति से अवगत नहीं कराने को भी गंभीर लापरवाही माना गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए निगमायुक्त तपस्या परिहार ने निलंबन का आदेश जारी किया।
बुजुर्ग की मौत के मामले में प्रशासन का सख्त रुख
जर्जर भवन का हिस्सा गिरने से हुई बुजुर्ग की मौत ने भवनों की सुरक्षा और नगर निगम की जिम्मेदारियों पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे भवनों को समय पर हटाना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। आदेश में संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
निलंबन अवधि में निगम मुख्यालय रहेगा कार्यस्थल
निलंबन अवधि के दौरान उपयंत्री संजय मिश्रा का मुख्यालय नगर पालिक निगम कटनी निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
निगमायुक्त की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश है कि नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में लापरवाही और निर्धारित जिम्मेदारियों के निर्वहन में उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना होगा कि नगर निगम के अन्य क्षेत्रों में मौजूद जर्जर भवनों को लेकर प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

