कटनी-जबलपुर रेल रूट पर अवैध खाने का कथित कारोबार! विनायक रजक का नाम और RPF जवान की भूमिका पर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में
चल रहा खेल?
ट्रेनों में रेस्टोरेंट के पर्चे, जबलपुर में खाने की सप्लाई और कथित बेस किचन में बासी भोजन गर्म कर परोसने के आरोप;
जबलपुर/कटनी। पश्चिम मध्य रेलवे के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क में अवैध वेंडिंग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जबलपुर, कटनी, मुड़वारा और कटनी साउथ जैसे स्टेशनों से जुड़ी कथित गतिविधियों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था, खाद्य गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ट्रेनों में रेस्टोरेंट के पर्चे बांटकर यात्रियों से खाने के ऑर्डर लिए जाते हैं और जबलपुर स्टेशन पहुंचने पर कोचों में भोजन की सप्लाई की जाती है।
इस मामले में विनायक रजक का नाम सामने आने और एक RPF जवान की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और स्पष्ट करें कि यदि वेंडिंग गतिविधियां अनधिकृत हैं, तो उन्हें रोकने में अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
ट्रेनों में पर्चे बांटने से लेकर खाने की सप्लाई तक, निगरानी कहां?
आरोपों के मुताबिक, कटनी से गुजरने वाली ट्रेनों में यात्रियों तक रेस्टोरेंट के पर्चे पहुंचाए जाते हैं। इन पर्चों के जरिए ऑर्डर लेकर जबलपुर स्टेशन पर भोजन की आपूर्ति की जाती है। यदि यह गतिविधियां बिना अनुमति संचालित हो रही हैं, तो सवाल उठता है कि ट्रेन के भीतर से लेकर स्टेशन पर भोजन पहुंचाने तक इस व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?
रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे, आरपीएफ की तैनाती और कमर्शियल विभाग की व्यवस्था होने के बावजूद कथित अवैध वेंडिंग की शिकायतें सामने आना निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। रेलवे को संबंधित वेंडरों के लाइसेंस, सप्लाई व्यवस्था और ट्रेनों में पर्चे बांटने की शिकायतों की जांच करनी चाहिए।
बासी भोजन और अस्वच्छ बेस किचन के आरोप, यात्रियों के स्वास्थ्य का सवाल
मामले का दूसरा गंभीर पहलू कथित बेस किचन की स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ स्थानों पर साफ-सफाई के मानकों का पालन नहीं किया जाता और बचे हुए भोजन को अगले दिन दोबारा गर्म कर यात्रियों को परोसने की आशंका है।
यदि जांच में ऐसी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो यह यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। रेलवे प्रशासन, IRCTC और खाद्य सुरक्षा विभाग को संबंधित ठिकानों का निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता, भंडारण, स्वच्छता और आवश्यक लाइसेंस की जांच करनी चाहिए।
सवाल यह है कि यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित कर रहा है और शिकायतों पर कार्रवाई कब होगी?
विनायक रजक और RPF जवान की भूमिका पर उठे सवाल
कथित अवैध वेंडिंग के मामले में विनायक रजक और एक RPF जवान की भूमिका को लेकर मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती, लेकिन इनकी गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन को तथ्यों की पड़ताल करनी चाहिए।
जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित वेंडरों के पास वैध अनुमति है या नहीं, उन्हें स्टेशन और ट्रेनों तक पहुंच कैसे मिलती है और क्या किसी कर्मचारी ने नियमों का उल्लंघन किया है। यदि किसी की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके बावजूद सवाल है कि क्या ऐसी कार्रवाई अवैध वेंडिंग को स्थायी रूप से रोकने के लिए पर्याप्त है? यदि ट्रेनों में ऑर्डर लेने और स्टेशन पर भोजन पहुंचाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो केवल वेंडरों को पकड़ने के बजाय कथित सप्लाई नेटवर्क और भोजन तैयार करने वाले ठिकानों की भी जांच जरूरी है।
रेलवे प्रशासन से जवाब मांगते अहम सवाल
- ट्रेनों में रेस्टोरेंट के पर्चे बांटकर ऑर्डर लेने की गतिविधियों की जांच कब होगी?
- विनायक रजक और RPF जवान की कथित भूमिका की निष्पक्ष जांच कौन करेगा?
- कथित बेस किचन की स्वच्छता और भोजन की गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं?
- बासी भोजन दोबारा गर्म कर परोसने के आरोपों की पुष्टि के लिए क्या कदम उठाए गए?
- सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कथित अवैध वेंडर ट्रेनों तक कैसे पहुंच रहे हैं?
- यदि किसी कर्मचारी की मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी?
अब सवाल सिर्फ वेंडरों का नहीं, पूरी निगरानी व्यवस्था का है!
रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलना चाहिए। कथित अवैध वेंडिंग और बेस किचन से जुड़ी शिकायतों की अनदेखी नहीं की जा सकती। मामले की जांच केवल खानापूर्ति तक सीमित रहने के बजाय उन सभी कड़ियों तक पहुंचनी चाहिए, जिनके माध्यम से भोजन की सप्लाई की जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल—कटनी से जबलपुर तक कथित अवैध वेंडिंग का यह खेल आखिर कैसे चल रहा है और इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है?
पश्चिम मध्य रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों, आरपीएफ, कमर्शियल विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग को मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। आरोप प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।
रिपोर्टर अभिमन्यु विश्वकर्मा की खास रिपोर्ट द भारतवर्ष

