कटनी में नवरात्र के फ्लेक्स-बैनर फाड़ने के आरोप पर बवाल! नगर निगम के बाहर हंगामा, सड़क जाम कर प्रदर्शन
मिशन चौक पर लगे फ्लेक्स-बैनर फाड़ने का आरोप, अतिक्रमण अधिकारी मनेंद्र सिंह के खिलाफ नारेबाजी; निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
कटनी। नवरात्र पर्व के दौरान लगाए गए फ्लेक्स-बैनर फाड़े जाने के आरोप ने कटनी में नया विवाद खड़ा कर दिया है। मिशन चौक के पास लगे फ्लेक्स-बैनर को कथित तौर पर फाड़े जाने से नाराज समाजसेवियों ने शुक्रवार को नगर निगम कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के अतिक्रमण विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अधिकारी मनेंद्र सिंह के विरोध में मुर्दाबाद के नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान नगर निगम कार्यालय के बाहर रास्ता जाम कर दिया गया, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।
फ्लेक्स-बैनर फाड़ने के आरोप से भड़का आक्रोश
पूरा मामला कटनी के मिशन चौक के पास का बताया जा रहा है, जहां नवरात्र पर्व के अवसर पर फ्लेक्स-बैनर लगाए गए थे। आरोप है कि नगर निगम के अतिक्रमण विभाग के कर्मचारियों ने इन फ्लेक्स-बैनर को फाड़ दिया। इस घटना से नाराज अभिषेक ताम्रकार सहित शहर के समाजसेवी नगर निगम कार्यालय पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
अतिक्रमण विभाग के खिलाफ नारेबाजी, जवाबदेही तय करने की मांग
प्रदर्शन के दौरान अतिक्रमण विभाग के अधिकारी मनेंद्र सिंह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि फ्लेक्स-बैनर किसके निर्देश पर हटाए गए या फाड़े गए। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा गलती सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
नगर निगम कार्यालय के बाहर सड़क जाम, यातायात प्रभावित
विरोध प्रदर्शन के दौरान नगर निगम कार्यालय के बाहर रास्ता जाम होने से आवागमन प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने मामले में प्रशासन की जवाबदेही तय करने और नगर निगम प्रशासन से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।
अब नगर निगम प्रशासन की भूमिका पर निगाहें
नवरात्र जैसे धार्मिक पर्व के दौरान लगाए गए फ्लेक्स-बैनर को लेकर उठे इस विवाद ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि बैनर हटाने की कार्रवाई की गई थी, तो क्या वह नियमानुसार थी? और यदि फ्लेक्स-बैनर फाड़े गए हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
फिलहाल, मामले में नगर निगम प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कराता है या नहीं और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

