कटनी में ट्रैफिक कार्रवाई के नाम पर कथित अवैध वसूली! स्टेशन चौराहे से सुभाष चौक तक नगर सैनिक की भूमिका पर उठे सवाल
कटनी। शहर के प्रमुख चौराहों पर वाहन चालकों को रोककर कथित तौर पर अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया है। स्टेशन चौराहा, सुभाष चौक और मुड़वारा तिराहे पर दोपहिया वाहन चालकों को रोककर किनारे ले जाने और कथित रूप से 200, 300 से लेकर 500 रुपये तक लेकर छोड़ने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में मिश्रा नामक नगर सैनिक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
कार्रवाई के नाम पर वसूली का आरोप, 185 की कार्रवाई का डर दिखाने का दावा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एक पीड़ित ने अपनी पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर इस मामले को सामने लाने की बात कही है। आरोप है कि कुछ वाहन चालकों को रोककर सड़क किनारे ले जाया जाता है और कथित तौर पर पैसों के लेन-देन के बाद उन्हें जाने दिया जाता है। वहीं, पैसे नहीं देने वाले वाहन चालकों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत कार्रवाई की धमकी देकर थाने ले जाने का डर दिखाए जाने की बात भी सामने आई है।
पीड़ित के अनुसार, कार्रवाई के डर और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण कई लोग कथित तौर पर पैसे देकर मौके से निकलना ही बेहतर समझते हैं। हालांकि, इन घटनाओं के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
अधिकारी की मौजूदगी को लेकर भी सवाल
मामले में यह आरोप भी लगाया गया है कि संबंधित स्थानों पर अधिकारी की मौजूदगी के बावजूद नगर सैनिक के माध्यम से वाहन चालकों से बातचीत कर मामले निपटाए जाते हैं। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह जांच का विषय है कि कार्रवाई किस अधिकारी के निर्देश पर की जा रही है और मौके पर किसी प्रकार का अवैध लेन-देन तो नहीं हो रहा।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कब लेंगे संज्ञान?
शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था बनाए रखना और नियमों का पालन कराना पुलिस एवं संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में वाहन चालकों से कथित अवैध वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।
अब सवाल यह है कि क्या कटनी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्टेशन चौराहा, सुभाष चौक और मुड़वारा तिराहे पर की जा रही कथित गतिविधियों की जांच कराएंगे? क्या संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रिकॉर्ड की पड़ताल होगी? जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: इस मामले में संबंधित नगर सैनिक और जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभिमन्यु विश्वकर्मा की द भारतवर्ष के लिए खास रिपोर्ट

