पन्ना पवई मध्य प्रदेश
पवई में गणेशोत्सव की तैयारी जोरों पर, प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे मूर्तिकार
पवई नगर सहित पूरे क्षेत्र में गणेशोत्सव को लेकर उत्साह चरम पर है। आगामी सोमवार 14 सितंबर से शुरू हो रहे दस दिवसीय गणेशोत्सव के लिए मूर्तिकार दिन-रात प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। मुख्य पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। उत्सव का समापन 25 सितंबर अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के साथ
होगा। नगर के मूर्तिकला केंद्रों पर छोटी से लेकर 8-10 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं तैयार हो रही हैं। कारीगर रंग-रोगन और श्रृंगार में जुटे हैं। इस बार इको-फ्रेंडली मिट्टी की मूर्तियों की मांग ज्यादा है।
बाजार में भी रौनक बढ़ गई है। पूजन सामग्री, फूल-माला, लाइट-डेकोरेशन और पंडाल सजावट की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है। नगर के प्रमुख सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियों द्वारा पंडाल निर्माण अंतिम चरण में है।इसके साथ ही लोग अपने अपने घरों में भी बप्पा के आगमन की तैयारी
करने में लगे हुए हैं। गणेश चतुर्थी का पर्व प्राचीन काल से ही घरों में मनाया जाता रहा है, छत्रपति शिवाजी महाराज के काल में भी पुणे और महाराष्ट्र में गणेश उत्सव को राजकीय संरक्षण प्राप्त था । आधुनिक और सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत का श्रेय पुणे के भाऊ रंगारी गणपति को जाता है। इसके तुरंत बाद वर्ष 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे सार्वजनिक और व्यापक रूप दिया। उन दिनों अंग्रेज सरकार राजनीतिक सभाओं और लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर कड़ी पाबंदियां लगाती थी, धार्मिक आयोजनों का रोक नहीं थी इसलिए तिलक ने गणेश पंडालों को जनता को एकजुट करने का माध्यम बनाया था।

