कटनी में मिलावटखोरों का दूध कारोबार बेखौफ! जनता की सेहत से बड़ा खिलवाड़, खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
गांवों से रोजाना शहर पहुंच रहा हजारों लीटर दूध, शुद्धता की जांच न होने से खोवा-पनीर और मिठाइयों की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में
कटनी। शहर में दूध की बढ़ती मांग के बीच मिलावटखोरी का खेल तेजी से फलने-फूलने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीण अंचलों से रोजाना हजारों लीटर दूध पिकअप वाहनों, बाइक और अन्य साधनों से कटनी पहुंच रहा है, लेकिन इसकी गुणवत्ता की जांच को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुनाफे के लालच में दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए कथित तौर पर अमानक और हानिकारक पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि इन आशंकाओं की पुष्टि होती है, तो यह सीधे तौर पर शहरवासियों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ होगा।
बिना जांच डेयरियों से घरों तक पहुंच रहा दूध!
शहर में प्रवेश करने वाले दूध वाहनों, संग्रहण केंद्रों और डेयरियों पर नियमित जांच एवं सैंपलिंग की प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आने से मिलावट की आशंकाएं बढ़ रही हैं। यही दूध घरों के अलावा चाय दुकानों, होटलों और मिठाई की दुकानों तक पहुंचता है। सवाल यह है कि आखिर हजारों लीटर दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
दूध की शुद्धता पर सवाल तो खोवा-पनीर भी संदेह के घेरे में!
सबसे गंभीर चिंता दूध से तैयार होने वाले खोवा, पनीर और मिठाइयों को लेकर है। यदि कच्चे दूध की गुणवत्ता ही संदिग्ध है, तो उससे तैयार खाद्य पदार्थों की शुद्धता की गारंटी कैसे दी जा सकती है? त्योहारों और रोजमर्रा की खपत के बीच आम उपभोक्ता महंगे दाम चुकाने के बावजूद शुद्ध खाद्य सामग्री मिलने को लेकर चिंतित है।
पहले होती थी औचक जांच, अब कहां गई विभाग की सक्रियता?
स्थानीय लोगों और बुजुर्गों का कहना है कि पहले चांडक चौक सहित शहर के प्रमुख बाजारों में खाद्य विभाग द्वारा दूध विक्रेताओं की नियमित औचक जांच की जाती थी। इससे कारोबारियों में कार्रवाई का डर बना रहता था। लेकिन अब ऐसी कार्रवाई कम दिखाई देने की शिकायतें हैं। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और मैदानी निगरानी पर सवाल उठना लाजिमी है।
अब कार्रवाई का इंतजार, विभाग से तीन बड़ी मांगें
- ग्रामीण क्षेत्रों से कटनी आने वाले दूध वाहनों और संग्रहण केंद्रों की औचक जांच कराई जाए।
- शहर की सभी प्रमुख डेयरियों और मिष्ठान भंडारों से दूध, खोवा एवं पनीर के नमूने लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
- जांच में मिलावट की पुष्टि होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आम जनता की सेहत की जिम्मेदारी कौन उठाएगा? क्या खाद्य सुरक्षा विभाग किसी बड़ी शिकायत या घटना का इंतजार कर रहा है, या फिर मिलावटखोरों पर समय रहते शिकंजा कसेगा? अब शहरवासियों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई का इंतजार है।

