पीएम आवास पर मंडराया संकट! जमीन खाली कराने की कार्रवाई में फंसा गरीब का आशियाना
2017 में नगर निगम के जरिए मिला था प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ, अब जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जिद में मकान; परिवार ने प्रशासन से लगाई राहत की गुहार
कटनी। कुठला थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में जमीन खाली कराने की प्रशासनिक कार्रवाई के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक मकान को लेकर मामला सामने आया है। भानु वंशकार के परिवार का कहना है कि वर्ष 2017 में नगर निगम के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला था, जिसके बाद इसी भूमि पर मकान का निर्माण कराया गया। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जमीन खाली कराने की कार्रवाई शुरू होने से परिवार के सामने अपने आशियाने को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
परिवार के मुताबिक वे लंबे समय से इस क्षेत्र में रह रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें आवास निर्माण का लाभ मिला था। सरकारी योजना के तहत मकान बनने के वर्षों बाद अब जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जिद में मकान जाने से परिवार परेशान है।
सरकारी योजना के तहत मकान, अब हटाने की कार्रवाई
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि संबंधित परिवार को सरकारी प्रक्रिया के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया था, तो आवास स्वीकृति के समय भूमि की स्थिति की जांच किस स्तर पर हुई थी। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों के दस्तावेजों और निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी किए जाने के बाद ही आवास निर्माण की कार्रवाई आगे बढ़ती है।
ऐसे में अब परिवार द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि भूमि को लेकर कोई कानूनी अथवा प्रशासनिक स्थिति थी, तो आवास स्वीकृत किए जाने से पहले इसकी जानकारी संबंधित विभागों को क्यों नहीं हुई।
परिवार बोला—सरकारी योजना के भरोसे बनाया आशियाना
भानु वंशकार के परिवार का कहना है कि उन्होंने सरकारी योजना के भरोसे अपना मकान बनाया और वर्षों से इसी घर में रह रहे हैं। अब जमीन खाली कराने की कार्रवाई के चलते परिवार के सामने रहने की समस्या उत्पन्न होने की आशंका है।
परिवार ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा उनकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए राहत देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी योजना के तहत आवास दिया गया था, तो वर्तमान कार्रवाई से पहले संबंधित विभागों द्वारा पूरे मामले की जांच की जानी चाहिए।
जांच से सामने आ सकती है पूरी स्थिति
यह मामला सरकारी आवास योजना के प्रक्रिया और भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच से जुड़े सवाल भी सामने ला रहा है। आखिर आवास स्वीकृत किए जाने के समय भूमि की स्थिति क्या थी, संबंधित दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई और वर्तमान कार्रवाई की स्थिति में हितग्राही परिवार के लिए क्या प्रावधान हैं—इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल परिवार प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है। अब जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर है। परिवार का कहना है कि वे अपना पक्ष प्रशासन के समक्ष रखेंगे और न्यायसंगत समाधान की मांग करेंगे।

