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कट चाय के नाम पर फुल दाम! स्टेशन के बाहर टी-स्टॉल पर ग्राहकों से कथित मनमानी वसूली

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कट चाय के नाम पर फुल दाम! स्टेशन के बाहर टी-स्टॉल पर ग्राहकों से कथित मनमानी वसूली

5 रुपए वाली कट चाय के लिए 10 रुपए वसूले जाने के आरोप, गर्म चाय प्लास्टिक कप-पॉलिथीन में देने पर भी उठे सवाल

कटनी। शहर में चाय की चुस्कियों के साथ अब मुनाफाखोरी की कड़वाहट भी महसूस होने लगी है। रेलवे स्टेशन सहित शहर के कई इलाकों में संचालित टी-स्टॉल पर कट चाय के नाम पर फुल चाय की कीमत वसूले जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्राहकों का कहना है कि जिस कट चाय के लिए पहले करीब 5 रुपए लिए जाते थे, वहीं अब कई जगह 10 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। मात्रा कम होने के बावजूद कीमत पूरी चाय के बराबर होने से उपभोक्ताओं में नाराजगी है।

कट चाय कम, दाम ज्यादा—ग्राहक परेशान

रेलवे स्टेशन के आसपास चाय की दुकानों पर सुबह से देर रात तक यात्रियों और स्थानीय लोगों की भीड़ रहती है। इसी भीड़ का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्राहकों का कहना है कि कट चाय का कप छोटा होता है, लेकिन कीमत पूरी चाय जितनी ली जाती है। ऐसे में 10 रुपए खर्च करने के बाद ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करता है।

स्टेशन के अंदर रेट तय, बाहर मनमानी का आरोप

रेलवे स्टेशन परिसर में बिकने वाली चाय की मात्रा और कीमत निर्धारित व्यवस्था के तहत होती है, लेकिन स्टेशन के बाहर चाय के अलग-अलग दाम वसूले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सवाल यह भी है कि क्या टी-स्टॉल संचालकों द्वारा चाय की मात्रा और कीमत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जा रही है या नहीं।

प्लास्टिक कप और पॉलिथीन में गर्म चाय पर भी सवाल

चाय की बिक्री से जुड़ा एक दूसरा गंभीर मुद्दा गर्म चाय को प्लास्टिक युक्त कप और पॉलिथीन में देने का भी है। शहर में कई जगह ग्राहकों को कांच या कागज के कप की जगह प्लास्टिक कप में गर्म चाय परोसी जाती है। वहीं कुछ दुकानों पर गर्म चाय पॉलिथीन में पैक कर देने की बात भी सामने आती है।

विशेषज्ञों के अनुसार गर्म खाद्य पदार्थों के लिए पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल निर्धारित खाद्य-सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा टी-स्टॉल और दुकानों में इस्तेमाल हो रही सामग्री की जांच किए जाने की जरूरत है।

चाय का कारोबार बना रोजगार का बड़ा जरिया

कटनी शहर में चाय की छोटी गुमटियों से लेकर आधुनिक टी-स्टॉल तक बड़ी संख्या में दुकानें संचालित हो रही हैं। अलग-अलग फ्लेवर की चाय, गुड़ की चाय और अन्य प्रकार की चाय ने भी बाजार में अपनी जगह बना ली है। चाय अब सिर्फ पेय पदार्थ नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार का माध्यम भी बन चुकी है।

रोजाना लाखों का कारोबार, फिर भी निगरानी जरूरी

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक चाय की खपत काफी अधिक है। सुबह की शुरुआत से लेकर बाजार, चौक-चौराहों, दुकानों और कार्यक्रमों तक चाय की मांग बनी रहती है। ऐसे में चाय के कारोबार में उपभोक्ताओं से मात्रा के अनुपात में उचित कीमत वसूली जा रही है या नहीं, इस पर संबंधित विभाग की निगरानी जरूरी है।

‘कट चाय के बदले 10 रुपए लेना उपभोक्ता के साथ ठगी’

अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिशंकर शुक्ला ने कहा कि मात्रा के हिसाब से चाय का रेट तय होना चाहिए। 10 रुपए लेकर कट चाय देना गलत है और यह उपभोक्ताओं के साथ ठगी की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारी बिना शिकायत का इंतजार किए भी ऐसे मामलों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं।

अब सवाल यह है कि स्टेशन और शहर के टी-स्टॉल पर चाय की कीमत और मात्रा को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था लागू होगी या उपभोक्ताओं को इसी तरह ‘कट चाय, फुल दाम’ का सामना करना पड़ेगा?

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