रासलीला की भक्ति में सराबोर हुआ सब जेल पवई परिसर, कंस वध के बाद हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह
पन्ना, मध्य प्रदेश। सब जेल पवई परिसर में जेल प्रशासन के मार्गदर्शन एवं विशेष पहल पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास डॉ. रजनीश शास्त्री जी ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला, कंस वध तथा भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के माध्यम से जीव और परमात्मा के बीच निष्काम प्रेम, भक्ति और पूर्ण समर्पण का आध्यात्मिक संदेश दिया गया। कथा व्यास ने बताया कि सच्ची भक्ति में किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं होता, बल्कि भक्त का अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण ही भक्ति का आधार है।
इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अत्याचारी कंस के वध का प्रसंग सुनाया गया। कंस वध के प्रसंग ने अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु और बंदी भक्ति भाव में डूबे नजर आए।
कथा के समापन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह का मनोहारी प्रसंग प्रस्तुत किया गया। विवाह प्रसंग शुरू होते ही पूरा सब जेल परिसर भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा। श्रद्धालुओं एवं बंदियों ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव में उत्साहपूर्वक सहभागिता की और वातावरण मंगलमय हो गया।
जेल प्रशासन द्वारा आयोजित इस धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन का उद्देश्य बंदियों के भीतर आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच, सदाचार और आत्मचिंतन की भावना को बढ़ावा देना है। साथ ही उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देना भी इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
श्रीमद्भागवत कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से दिए जा रहे संदेश से सब जेल पवई परिसर में श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

