गणेश उत्सव में श्रद्धा के साथ स्वच्छता का भी रखें ध्यान
पूजन सामग्री नदी तालाबों और जलस्रोतों में न डालें, निर्धारित पात्रों में ही करें संग्रहित
घर और मंदिरों से पूजन सामग्री एकत्रित करने निगम की विशेष व्यवस्था
कटनी – गणेश चतुर्थी से प्रारंभ हो रहे गणेश उत्सव को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाने के साथ शहर की स्वच्छता और पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी भी हम सभी की है। इसी उद्देश्य से नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि गणेश पूजन के बाद निकलने वाले फूल, माला, पत्तियां और अन्य पूजन सामग्री को नदी, नाला, तालाब अथवा किसी भी जलस्रोत में नहीं डालें।
पूजन सामग्री को जल में प्रवाहित करने के बजाय उसे अलग से एकत्रित कर निर्धारित पात्रों में रखें। इससे जलस्रोतों में गंदगी जाने से रोकने के साथ शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
घर और मंदिरों से भी पूजन सामग्री की संग्रहण व्यवस्था
नगर निगम द्वारा गणेश उत्सव के दौरान पूजन सामग्री के संग्रहण एवं उचित निपटान के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। निगम के वाहनों के माध्यम से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित मंदिरों एवं नागरिकों के घरों से पूजन सामग्री एकत्रित की जा रही है। एकत्रित सामग्री का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उचित निपटान किया जाएगा।
निगम ने नागरिकों से यह भी आग्रह किया है कि गणेश प्रतिमाओं के साथ आने वाली सजावटी सामग्री, प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट को पूजन सामग्री से अलग रखें और निर्धारित व्यवस्था में ही दें। इससे कचरे का पृथक्करण और स्वच्छता व्यवस्था अधिक प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकेगी।
आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा भी जरूरी
गणेश उत्सव आस्था और उल्लास का पर्व है। हमारी पूजा और श्रद्धा तभी और सार्थक होगी, जब इसके साथ प्रकृति और शहर की स्वच्छता का भी ध्यान रखा जाए। पूजन सामग्री को जलस्रोतों में प्रवाहित करने के बजाय निगम की संग्रहण व्यवस्था में देना एक छोटा कदम है, लेकिन इसका पर्यावरण पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
नगर निगम ने गणेश उत्सव समितियों, मंदिर प्रबंधकों और सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि “श्रद्धा के साथ स्वच्छता का भी रखें ध्यान” और पूजन सामग्री के उचित संग्रहण में निगम का सहयोग करें। नागरिकों के सहयोग से गणेश उत्सव को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल उत्सव बनाया जा सकता है।

