पवई पन्ना मध्य प्रदेश
अनादि निधन पर्यूषण महापर्व दस लक्षण धर्मोंकी आराधना पूजन कल से शुरू
आत्म शुद्धि और साधना के लिए दस दिनों तक बृत उपवास साधना करेंगे जैन धर्म अनुयाई
पवई में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ त्याग तपस्या साधना हेतु तैयारियां जारी
पवई – दशलक्षण पर्यूषण महापर्व एक अनादि-निधन पर्व है। यह वर्ष में तीन बार मनाया जाता है भाद्रपद (भादों) मास , माघ मास , चैत्र मास इन तीनों महीनों में शुक्ल पक्ष की पंचमी से चतुर्दशी तक (१० दिनों तक) यह पर्व मनाया जाता है।
विशेष रूप से भादों के महीने में पूरे भारतवर्ष में यह पर्व आत्म साधना , त्याग तपस्या और पूर्ण संयम के साथ बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
दशलक्षण धर्म के दौरान लगातार शुक्ल पक्ष की पंचमी से चतुर्दशी तक दस दिनों तक चौबीस घंटों में मात्र एक बार ही शुद्ध सात्विक भोजन आहार पानी( बगैर हरी सब्जियों के) लेकर एकासन अथवा भोजन पानी सभी का त्याग कर उपवास करते हैं और पूरी दिनचर्या आत्म साधना में लीन रहते हुवे धार्मिक आयोजनों जप साधना में लीन रहते है । प्रथम दिन पंचमी को उत्तम क्षमा धर्म की साधना पूजन इसी क्रम में अगले दिन उत्तम मार्दव धर्म अर्थात मृदुलता , उत्तम आर्जव धर्म अर्थात , उत्तम सत्य धर्म उत्तम शौच धर्म अर्थात सुचिता , उत्तम संयम धर्म, उत्तम तप धर्म , उत्तम त्याग धर्म , उत्तम अकिंचन धर्म , उत्तम बृम्हचर्य धर्म की पूजा आराधना समस्त जैन समाज एवं जैन श्रावकों तथा सत्य सनातन जैन धर्म का पालन करने वाले जैनेतर महानुभावों के द्वारा की जाती है । इस पर्व के दौरान जैन समाज द्वारा सांस्कृतिक सामाजिक एवं अन्य धार्मिक आयोजन करायें जाते हैं इसी श्रृंखला में जैन समाज पवई द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पर्यूषण महापर्व दस लक्षण धर्मों की आराधना करने मन्दिर जी में तैयारियां की गई है भाद्र शुक्ल पक्ष पंचमी 16 सितम्बर से दस धर्मों की पूजा के बृत उपवास करते हुए आत्म कल्याण एवं आत्मा की शुद्धि के लिए जैन श्रावकों ने अपने आपको तैयार किया है प्रतिदिन प्रातः 07 बजे 1008 श्री जिनेन्द्र भगवान की प्रतिमा जी का अभिषेक पूजन एवं सायं को 7,30 बजे से पंच परमेष्ठी भगवान की वृहद आरती रात्रि 09 बजे से शास्त्र वाचन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजनों की रूपरेखा महिला मंडल पवई के द्वारा विगत दिनों तैयार की गई है ।

