पवई में पटवारियों ने खोला मोर्चा, तीन दिन रहेगा शासकीय कामकाज का बहिष्कार
स्वामित्व अभिलेख एवं परिमार्जन-2026 में तकनीकी-अधिकारी दिक्कतों का विरोध, तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
पन्ना। प्रांतीय पटवारी संघ भोपाल के आह्वान पर तहसील पवई के समस्त पटवारियों ने 7 से 9 अक्टूबर तक तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश पर जाने का निर्णय लिया है। पटवारियों ने इस दौरान मुख्यालय छोड़ने की अनुमति के साथ शासकीय कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करने की घोषणा की है। इस संबंध में पटवारियों ने तहसीलदार पवई को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की सूचना दी।
पटवारी संघ का कहना है कि प्रदेशभर में लागू की जा रही स्वामित्व अभिलेख निष्पादन एवं परिमार्जन-2026 योजना के क्रियान्वयन में पटवारियों को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। संघ के मुताबिक इन समस्याओं को लेकर पूर्व में कई बार शासन-प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।
नोटिस और कार्रवाई का भी विरोध
पटवारियों का आरोप है कि समस्याओं का निराकरण करने के बजाय प्रदेश के विभिन्न जिलों में पटवारी संवर्ग के खिलाफ कारण बताओ नोटिस, निलंबन सहित अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। ज्ञापन में नीमच जिले में परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवा समाप्ति के आदेश तथा कुछ जिलों में अवकाश के दिनों में भी योजना का कार्य कराए जाने का उल्लेख किया गया है।
इन्हीं मुद्दों के विरोध में प्रांतीय पटवारी संघ द्वारा प्रदेशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया गया है।
व्हाट्सएप ग्रुप से भी होंगे लेफ्ट
आंदोलन के तहत पवई तहसील के पटवारी 7, 8 और 9 अक्टूबर को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। पटवारियों ने नियमानुसार मुख्यालय छोड़ने की अनुमति लेने के साथ सभी शासकीय व्हाट्सएप ग्रुप से लेफ्ट होने और शासकीय कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करने की बात कही है।
अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा जारी किए गए कथित दमनात्मक आदेश तत्काल वापस नहीं लिए जाते हैं, तो संघ बिना किसी अग्रिम सूचना के अनिश्चितकालीन लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। संघ ने इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही है।
पटवारियों के तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश से राजस्व संबंधी कार्य, नामांतरण, सीमांकन सहित किसानों से जुड़े अन्य कार्य प्रभावित होने की संभावना है। अब देखना होगा कि प्रशासन और पटवारी संघ के बीच इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।

