पन्ना मध्य प्रदेश
अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस विशेष: दक्षिण पन्ना वन विभाग की पहल से 5 और बेटियों का प्रतिष्ठित अस्पतालों में प्लेसमेंट
ग्रीन इंडिया मिशन के तहत कौशल प्रशिक्षण से बेटियों के सपनों को मिल रहे पंख
पन्ना के असली हीरे यहां की धरती में नहीं, बल्कि यहां के युवाओं में हैं
अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस के अवसर पर दक्षिण पन्ना वनमंडल की बेटियों की सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। हाल ही में कल्पना यादव, रोशनी यादव, रीशू यादव, सीता कुमारी और ज्योति चौधरी का भोपाल के अपोलो सेज अस्पताल में चयन हुआ है, जहां उन्हें लगभग 15,000 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलेगा। इन पांच बेटियों की सफलता के साथ दक्षिण पन्ना वनमंडल की पहल से प्रतिष्ठित अस्पतालों में रोजगार पाने वाली बेटियों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। इनकी उपलब्धियां दर्शाती हैं कि पन्ना के असली हीरे केवल यहां की धरती में ही नहीं, बल्कि यहां की बेटियों में भी हैं।
मध्यप्रदेश वन विभाग के दक्षिण पन्ना वनमंडल द्वारा ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) के अंतर्गत संचालित जनरल ड्यूटी असिस्टेंट (GDA) प्रशिक्षण कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इससे पहले चार बेटियों को शाल्बी अस्पताल, जबलपुर तथा आठ को मेदांता अस्पताल, इंदौर में रोजगार के अवसर प्राप्त हुए थे। इन सफल प्रशिक्षार्थियों में प्रतीक्षा दुबे, सरस्वती गड़ारी, शिवानी साहू एवं प्रतीक्षा गर्ग सहित अन्य बेटियां शामिल हैं। हाल ही में खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने भी इन बेटियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया था। शाहनगर वन परिक्षेत्र में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए वॉकहार्ट फाउंडेशन को प्रशिक्षण सहयोगी संस्था बनाया गया था। कार्यक्रम का संचालन वन परिक्षेत्र अधिकारी राजुल कटारे एवं प्रशिक्षण पर्यवेक्षक आशीष पाण्डेय, वनपाल, की देखरेख में किया गया। प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीण एवं वनांचल की बेटियों को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्य करने के लिए आवश्यक कौशल एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया।
दक्षिण पन्ना वनमंडल की यह पहल वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस पर इन 17 बेटियों की उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि उचित अवसर, कौशल प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण अंचलों की बेटियां भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार, समाज और जिले का नाम रोशन कर सकती हैं।

